चतरा में सुखाड़ राहत का नौ करोड़ पैसा हुआ लैप्स,हाईकोर्ट ने सरकार से दो सप्ताह में मांगा जवाब
सुखाड़ राहत के तौर पर प्रभावित प्रखंडों के किसानों में वितरित होनी थी राशि अधिकारियों ने नहीं भेजी सूची
रांची – चतरा जिले में सुखाड़ राहत का नौ करोड़ रुपया अधिकारियों की लापरवाही से लैप्स हो गया,जिस मामले में दायर जनहित याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और अरुण कुमार की राय की अदालत ने सरकार से दो सप्ताह में।जवाब मांगा है। हंटरगंज के समाजसेवी जयद्रथ सिंह की तरफ से दायर याचिका पर अधिवक्ता राहुल कुमार और मनोज कुमार चौबे अदालत में पक्ष रख रहे हैं। वर्ष 2018- 19 में हुए सुखाड़ के बाद सरकार से मिलने वाले राहत अनुदान अधिकारियों की लापरवाही के कारण किसानों के बीच वितरण नही हो पाया था और सुखाड़ राहत की राशि वापस हो गई थी।
*अंचल कार्यालयों को भेजना था अनुदान स्वीकृति का प्रस्ताव*
किसानों की सूची उपलब्ध नहीं कराने के कारण राज्य सरकार द्वारा सुखाड़ राहत के लिए आवंटित 8 करोड़ 94 लाख 52 हजार 682 रुपये को राशि लैप्स हो गई।
जिला स्तर से सभी प्रखंडों से प्रस्ताव मांगा गया लेकिन किसी ने भी समय पर किसानों की सूची उपलब्ध नही कराया ।वर्ष 2018-19 में जिले के नौ प्रखंडों को सुखा घोषित किया था। जिसमें चतरा, इंटरगंज, प्रतापपुर, कुंदा, लाव्वालौर कानाचट्टो, इटखोरी, पत्थला और मयूरखंड प्रखंड शामिल है। उपयुक्त प्रखंडों में धान का उत्पादन लक्ष्य के अनुरूप नहीं हुआ था। सुखाड़ का आकलन के लिए प्रदेश सस्तरीय टीम ने प्रभावित प्रश्नों का निरीक्षण
किया था। जिसके बाद वितीय वर्ष 2019-20 में राज्य आपदा विधि से संबंधित प्रखंडों के किसानों के लिए आठ करोड़ 94 लाख 52 हजार 692 रुपये की राशि का आवंटन जिला आपदा प्रबंधन को पैजा। आवंटन के आलोक में नौ अक्टूबर 2019 को अपर समाहर्ता संतोष कुमार सिन्हा ने जिला कृषि पदाधिकारी एवं संबंधित सभी अंचलों के अधिकारिणों को निर्देश जारी करते हुए अनुदान राशि को स्वीकृति के लिए प्रस्ताव मांगा। लेकिन किसी भी अंचल से न तो प्रस्ताव आया और न ही प्रभावित किसानों की सूची भेजी। इसी बीच विधानसभा चुनाव की घोषणा हो गई। चुनाव संपन्न होने के बाद भी अधिकारियों ने इस दिशा में ध्यान नहीं दिया।जिसके कारण सुखाड़ राहत की राशि लैप्स कर गई।