Thursday, April 3, 2025

चीख-पुकार और कराहती चौपारण की सड़कें, लेकिन मानवता के रक्षक बने थाना प्रभारी अनुपम प्रकाश और चालक शक्ति

चीख-पुकार और कराहती चौपारण की सड़कें, लेकिन मानवता के रक्षक बने थाना प्रभारी अनुपम प्रकाश और चालक शक्ति

चौपारण इन दिनों सड़क हादसों का दर्दनाक केंद्र बन गया है। खासकर दनुआ घाटी में रोज़ हो रही दुर्घटनाओं ने इलाके में चीख-पुकार और कराहटों का सिलसिला जारी रखा है। लगातार हो रही दुर्घटनाओं से चौपारण पुलिस भी परेशान है। दुर्घटनाओं के कारण सड़कें बाधित हो जाती हैं, जिससे पुलिस को घायलों को अस्पताल पहुँचाने और यातायात सुचारू करने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है।

थाना प्रभारी अनुपम प्रकाश ने दिखाई संवेदनशीलता, रात 2 बजे तक घायलों की सेवा में जुटे

बीती रात जब चौपारण में एक भीषण सड़क हादसा हुआ, तो थाना प्रभारी अनुपम प्रकाश ने इंसानियत की मिसाल पेश की। वे खुद रात 2 बजे तक घटनास्थल पर डटे रहे और घायलों को अस्पताल पहुँचाने में सक्रिय भूमिका निभाई। उनके निर्देश पर तेजी से राहत और बचाव कार्य किया गया, जिससे कई लोगों की जान बचाई जा सकी।

आपदा मित्र सेवा फाउंडेशन की एंबुलेंस बनी जीवन रक्षक

इस दौरान ‘आपदा मित्र सेवा फाउंडेशन’ की एंबुलेंस सेवा एक बार फिर मददगार साबित हुई। गंभीर रूप से घायल मरीजों को पहले चौपारण लाया गया और फिर उनके परिजनों के पहुंचने के बाद गया मगध मेडिकल, रांची और हजारीबाग के बड़े अस्पतालों में रेफर किया गया।

एंबुलेंस चालक शक्ति बने घायलों के मसीहा

घटनास्थल से अस्पताल और रेफर सेंटर तक घायलों को पहुँचाने में एंबुलेंस चालक शक्ति का साहस और सेवा भावना लोगों को अभिभूत कर रहा है। दिन-रात मरीजों को अस्पताल पहुँचाने के कारण उन्हें सुबह भोर में ही नहाने और खाना खाने का समय मिल पाता है। लेकिन मानवता की सेवा में वे लगातार जुटे हुए हैं।

स्थानीय लोगों की मांग – कब रुकेगा यह सिलसिला?

स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को इस समस्या पर तुरंत ध्यान देना चाहिए। सड़क सुरक्षा के ठोस उपाय, ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार और स्पीड ब्रेकर लगाने की जरूरत है ताकि लगातार हो रही दुर्घटनाओं को रोका जा सके।

हालांकि, इन हादसों के बीच थाना प्रभारी अनुपम प्रकाश और एम्बुलेंस चालक शक्ति जैसे लोगों की निःस्वार्थ सेवा एक उम्मीद की किरण बनकर उभरी है। उनकी यह पहल प्रशासन और समाज के लिए एक उदाहरण है कि संवेदनशीलता और तत्परता से कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं। लेकिन सवाल यह है – क्या प्रशासन इन हादसों को रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाएगा, या चौपारण की सड़कें यूं ही चीख-पुकार और दर्द की गवाह बनती रहेंगी?

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